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जय अम्बे गौरी
🙏 माँ दुर्गा की आरती
अद्यतन: 28 फ़रवरी 2026
बारे में जय अम्बे गौरी
जय अम्बे गौरी माँ दुर्गा की प्रमुख आरती है। यह आरती परम दिव्य माँ का महिमामंडन करती है जिन्होंने महिषासुर का वध किया था। यह नवरात्रि समारोह का एक अनिवार्य हिस्सा है।
🪔 जय अम्बे गौरी — आरती के बोल
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी॥
मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजे॥
जय अम्बे गौरी॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥
जय अम्बे गौरी॥
शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
जय अम्बे गौरी॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी॥
भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
जय अम्बे गौरी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी॥
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे॥
जय अम्बे गौरी॥
आरती पाठ के लाभ जय अम्बे गौरी
- प्रमुख दुर्गा आरती
- नवरात्रि के दौरान आवश्यक
- बुरी शक्तियों को नष्ट करती है
- साहस और सुरक्षा प्रदान करती है




