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तुलसी चालीसा
📿 तुलसी माता चालीसा
द्वारा Traditional • अद्यतन 28 फ़रवरी 2026
बारे में तुलसी चालीसा
तुलसी चालीसा तुलसी माता को समर्पित 40 चौपाइयों की प्रार्थना है — हिंदू धर्म में देवी के रूप में पूजित पवित्र तुलसी का पौधा। तुलसी को सबसे पवित्र पौधा माना जाता है, जो देवी लक्ष्मी का साक्षात रूप है। वह भगवान विष्णु की प्रिय हैं। तुलसी की पूजा और इस चालीसा का पाठ करने से घर शुद्ध होता है, पाप दूर होते हैं, समृद्धि आती है और मोक्ष प्राप्त होता है।
📿 तुलसी चालीसा — चालीसा के बोल
॥ दोहा ॥
जय तुलसी माता जग जननी। विष्णु प्रिया सर्व विपत् हरनी॥
तव चरण रज जो सिर धरते। जन्म जन्म के पातक हरते॥
॥ चौपाई ॥
जय जय तुलसी माता जय जय। विष्णु प्रिया करो अभय अभय॥
पाटल वर्णी सुंदर काया। जगत को तुमने प्रेम दिखाया॥
तुलसी विष्णु की प्राण प्यारी। सदा कृष्ण को तुम हो न्यारी॥
तुलसीदल विष्णु को भाए। चरणामृत में तुझे मिलाए॥
पूजन में नित तुलसी राखें। घर में सुख शांति की आशा राखें॥
तुलसी विवाह कार्तिक होता। भक्त मंगल सुख सदा पोता॥
तुलसी घर में जहाँ विराजे। वहाँ रोग शोक कभी न राजे॥
तुलसी पूजा प्रात करना। माँ का आशीर्वाद नित भरना॥
वृंदावन में तुम संग राधा। हरि को तुम हो मन की साधा॥
व्रंदा नाम तुम्हारा जाना। जलंधर से मुक्ति का ठाना॥
शंखचूड़ वध में सहायी। हरि ने तब तुम्हें अपनाई॥
लक्ष्मी रूप में तुम अवतरी। विष्णु ने तुम्हें हृदय से वरी॥
तुलसी चालीसा जो गावे। घर में सुख समृद्धि पावे॥
जो यह पाठ करे नित भाई। तुलसी माता की कृपा पाई॥
॥ दोहा ॥
तुलसी माता शरण में, जो भक्त शीश नवाय।
पाप ताप सब दूर हो, मोक्ष मार्ग मिल जाय॥
चालीसा पाठ के लाभ तुलसी चालीसा
- घर और वातावरण को शुद्ध करती है
- पापों और नकारात्मकता को दूर करती है
- भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है
- स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करती है
- मोक्ष (मुक्ति) का मार्ग प्रशस्त करती है




