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संतोषी माता चालीसा
📿 संतोषी माता चालीसा
द्वारा Traditional • अद्यतन 28 फ़रवरी 2026
बारे में संतोषी माता चालीसा
संतोषी माता चालीसा संतोषी माता को समर्पित एक भक्ति स्तोत्र है — संतुष्टि और पूर्णता की देवी। वे भगवान गणेश की पुत्री हैं और विशेष रूप से शुक्रवार को पूरे भारत में पूजी जाती हैं। संतोषी माता व्रत (शुक्रवार का उपवास) के साथ इस चालीसा का पाठ करने से इच्छाओं की पूर्ति, पारिवारिक सुख और दुःख से मुक्ति मिलती है।
📿 संतोषी माता चालीसा — चालीसा के बोल
॥ दोहा ॥
जय संतोषी माता जग जननी। दुःख हर्ता सुख की दायिनी॥
गणपति नंदिनी जय जयकारी। शरण में आए भक्तन तुम्हारी॥
॥ चौपाई ॥
जय संतोषी जय जय माता। भक्तन की तुम हो सुखदाता॥
गणेश की तुम हो प्यारी पुत्री। जग में फैली तुम्हारी दुत्री॥
शुक्रवार को व्रत जो करता। संतोषी माता का भक्त बनता॥
खट्टी चीज व्रत में न खाना। यह नियम है माता का जाना॥
सत्तू गुड़ रोली लेकर आओ। माता को प्रसाद चढ़ाओ॥
कथा सुनाओ माता की प्यारी। दूर करें माता दुख हमारी॥
पुत्र दो जो पुत्र हीना। धन दो जो धन से रीना॥
सुख शांति घर में आती है। माता की कृपा जो पाती है॥
सोलह शुक्रवार का व्रत करना। माता का आशीर्वाद भरना॥
उद्यापन करना विधि से। माता प्रसन्न होती श्रद्धा से॥
जो माता की जय जय गावे। संतोष और सुख सो पावे॥
कष्ट में माता को पुकारो। माता दूर करे सब भारो॥
संतोषी माता चालीसा जो गावे। परिवार में सुख शांति पावे॥
जो यह पाठ करे मन लाई। माता की कृपा जाहिं पाई॥
॥ दोहा ॥
संतोषी माता शरण है, भक्तन का आधार।
दुःख दारिद्र हर सदा, करो सुखद संसार॥
चालीसा पाठ के लाभ संतोषी माता चालीसा
- सभी इच्छाओं और मनोकामनाओं को पूर्ण करती है
- शुक्रवार को पूजा के लिए सर्वोत्तम
- पारिवारिक शांति और सुख लाती है
- गरीबी और दुख दूर करती है
- संतुष्टि और आनंद प्रदान करती है




