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भगवान कार्तिकेय

कार्तिकेय चालीसा

📿 भगवान कार्तिकेय चालीसा

द्वारा Traditionalअद्यतन 28 फ़रवरी 2026

बारे में कार्तिकेय चालीसा

कार्तिकेय चालीसा भगवान कार्तिकेय (मुरुगन, स्कंद, सुब्रह्मण्य) को समर्पित है — युद्ध के देवता और दिव्य सेना के सेनापति। भगवान शिव और माँ पार्वती के पुत्र हैं। शत्रु पर विजय, प्रतिस्पर्धा में सफलता और साहस प्राप्ति के लिए इस चालीसा का पाठ किया जाता है।

📿 कार्तिकेय चालीसाचालीसा के बोल

॥ दोहा ॥ शक्ति हस्त षड्वदन शोभित, मयूर वाहन धारी। कार्तिकेय देवसेनापति, जय जय जय शिव प्यारी॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय कार्तिकेय गुणधामा। षण्मुख शक्तिधर शुभ नामा॥ शिव सुवन गौरी के नंदन। जय जय जय जगत के वंदन॥ गणेश बंधु जग पालनहारे। तारकासुर के प्राण संहारे॥ देव सेना के तुम अधिनायक। संकट हरण सदा सुखदायक॥ छह मुख बारह भुजा विराजे। वेल्ली देवसेना संग साजे॥ मयूर वाहन शोभा अपारा। दिव्य तेज से जग उजियारा॥ शक्ति त्रिशूल धरे भुज भारी। दुष्ट दलन भक्त हितकारी॥ शरवण में जन्म लियो तुमने। अग्नि से प्रकट रूप किया तुमने॥ कृत्तिकाओं ने पाला प्यारे। कार्तिकेय नाम हुआ तुम्हारे॥ स्कंद नाम से जग में ख्याता। ब्रह्मांडी के तुम हो विधाता॥ दक्षिण भारत मुरुगन कहाते। सुब्रह्मण्य नाम सब जन गाते॥ पालनी में तुम विराज करते। भक्तों के सब संकट हरते॥ तिरुपरनकुंड्रम तुम्हें पूजें। चेन्दूर में भक्त नित सूजें॥ सत्य धर्म के परम निशाना। जगत पिता ब्रह्म का ज्ञाना॥ गणेश जी महाराज तुम्हारे। भाई प्रेम से भक्त न्यारे॥ शत्रु नाश कीजे महाराजा। विजय दिलाइए धर्म के काजा॥ प्रेम भक्ति से जो यश गावे। कार्तिकेय की कृपा पावे॥ जो यह पाठ करे चित लाई। ताकी कष्ट सभी जाहिं नसाई॥ ॥ दोहा ॥ कार्तिकेय कृपा करो, दीजे शक्ति अपार। विघ्न विनाशक वीर प्रभु, जय जय जगत आधार॥

चालीसा पाठ के लाभ कार्तिकेय चालीसा

  • शत्रुओं पर विजय प्रदान करता है
  • प्रतियोगिता और परीक्षाओं में सफलता
  • साहस और शारीरिक बल देता है
  • दक्षिण भारत में मुरुगन के रूप में पूजनीय
  • सभी कार्यों में सेनापति का आशीर्वाद