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जगन्नाथ चालीसा
📿 भगवान जगन्नाथ चालीसा
द्वारा Traditional • अद्यतन 28 फ़रवरी 2026
बारे में जगन्नाथ चालीसा
जगन्नाथ चालीसा भगवान जगन्नाथ — ब्रह्मांड के स्वामी — को समर्पित है, जिनकी पूजा ओडिशा के पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में होती है। वे भगवान कृष्ण का स्वरूप हैं और भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा के साथ पूजे जाते हैं। वार्षिक रथ यात्रा उनका सर्वाधिक प्रसिद्ध उत्सव है।
📿 जगन्नाथ चालीसा — चालीसा के बोल
॥ दोहा ॥
जय जगन्नाथ जगत आधारा। दीनन के तुम हो रखवारा॥
नीलांचल में किया निवासा। पुरी धाम में पूर्ण प्रकाशा॥
॥ चौपाई ॥
जय जगन्नाथ जगत के स्वामी। सर्वव्यापक पूर्ण अन्तर्यामी॥
बलभद्र सुभद्रा संग बिराजें। तीनों मिल जग के मन राजें॥
पुरी धाम में निवास तुम्हारा। चारों धाम में एक सहारा॥
नीलमाधव पूर्व में कहाते। विश्वविदित प्रभु यश सुनाते॥
इन्द्रद्युम्न ने मंदिर बनवाया। विश्वकर्मा ने रूप सजाया॥
सबरी कन्या द्वारा प्रकटाए। भक्त विदापति को दर्शन पाए॥
रथ यात्रा में जग को तारो। गुण्डिचा मंदिर पथ को सारो॥
भक्त खिंचते जग में आते। रथ की रस्सी हाथ लगाते॥
महाप्रसाद अन्नब्रह्म कहावे। छप्पन भोग नित शोभा पावे॥
राजा हो चाहे हो रंका। सबको भोग मिले प्रभु तंका॥
जगन्नाथ के रूप निराले। काठ के बने पर हृदय उजाले॥
भक्ति भाव से जो दर्शन करते। उनके जन्म जन्म के पाप हरते॥
जय जय कह सब भक्त पुकारें। जगन्नाथ सबके दुख टारें॥
जो यह चालीसा पढ़ मन लाई। ताको कष्ट सभी जाहिं नसाई॥
॥ दोहा ॥
जगन्नाथ दयानिधि, पुरी धाम के नाथ।
बलभद्र सुभद्रा सहित, सदा रहो मेरे साथ॥
चालीसा पाठ के लाभ जगन्नाथ चालीसा
- ब्रह्मांड के स्वामी का आशीर्वाद
- पुरी जगन्नाथ मंदिर के प्रसिद्ध देवता
- रथ यात्रा का पुण्य लाभ
- सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं
- ओडिशा और बंगाल में अत्यंत लोकप्रिय




