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भगवान कृष्ण

आरती कुंजबिहारी की

🙏 भगवान कृष्ण की आरती

अद्यतन: 28 फ़रवरी 2026

बारे में आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की भगवान कृष्ण को समर्पित सबसे प्रिय आरतियों में से एक है। यह सुंदर आरती कृष्ण के मनमोहक रूप, उनके पीले वस्त्र, उनके मुकुट पर मोर पंख और उनके चंचल दिव्य स्वभाव का वर्णन करती है।

🪔 आरती कुंजबिहारी कीआरती के बोल

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा। स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच; चरन छवि श्रीबनवारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ चमकती उज्ज्वल तट रेनु, बज रही वृंदावन बेनु। चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनु; हंसत मृदु मंद, चांद नी चंद, कटत भव फंद; टेर सुन दीन भिखारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती पाठ के लाभ आरती कुंजबिहारी की

  • सबसे लोकप्रिय कृष्ण आरती
  • वृंदावन के मंदिरों में प्रतिदिन गाई जाती है
  • हृदय को दिव्य प्रेम से भर देती है
  • जन्माष्टमी के लिए उत्तम