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Goddess Saraswati

Saraswati Chalisa

📿 Goddess Saraswati Chalisa

By TraditionalUpdated 28 February 2026

About Saraswati Chalisa

Saraswati Chalisa is a 40-verse devotional prayer dedicated to Goddess Saraswati — the goddess of knowledge, music, arts, and wisdom. She is the consort of Lord Brahma and the embodiment of intelligence. Reciting this chalisa is particularly beneficial for students, artists, and those seeking intellectual and creative excellence.

📿 Saraswati ChalisaLyrics in Hindi

॥ दोहा ॥ जनक जननि पदु कमल रज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौ सरस्वती मातु पद, बुद्धि बल देहु मोहि हर॥ ॥ चौपाई ॥ जय सरस्वती जय जय जय, शारदे। ब्रह्म सुता विद्या की मातु दया दे॥ जयति जयति जय शारदा भवानी। सुर नर मुनि सब करहिं बठानी॥ ब्रह्मा वेद पाठ जब कीन्हा। सरस्वती को प्रथम पूज्य पद दीन्हा॥ श्वेत वस्त्र धारिणी माता। हंस वाहिनी विद्या की दाता॥ वीणा पुस्तक कर में सोहे। शारदा रूप भक्तन के मन मोहे॥ ज्ञान बुद्धि विद्या की देवी। देव धनुज सब तुमको सेवी॥ तुम ही हो वाणी की दाता। ब्रह्म पुत्रि वेद जननी विख्याता॥ जो सुमिरै तुमको चित लाई। ताको कष्ट न कबहूं आई॥ शारद नाम तुम्हारो लीन्हा। मुनि जन सब सुख पावहिं तीन्हा॥ विद्या बुद्धि मोहिं कछु नाहीं। तुमहिं राखो जननी मन मांही॥ बाल समय तुमही हो सहाई। विद्या बुद्धि तुमरी सरणाई॥ कठिन कष्ट सब देहु विदारी। बुद्धि बल माता देहु हमारी॥ महिमा अगम तुम्हारी माता। वेद पुराण सब यश को गाता॥ जो तुमको ध्यावै मन लाई। ताके कष्ट सब रहहिं न जाई॥ ब्रह्मा विष्णु महेश सब ध्यावैं। सरस्वती तुमरी शरण में आवैं॥ विद्या के तुम हो भण्डारा। ज्ञान बुद्धि को अमित अपारा॥ नारद शारद सब गुन गावैं। तुमरी महिमा पार न पावैं॥ सकल अविद्या तुम ही हरनी। ज्ञान बुद्धि को मंगल करनी॥ करुणामयी तुम हो सुख कारी। भक्तन की तुम हो भय हारी॥ वाणी में तुम अमृत घोलौ। मधुर बोल सब विधि प्रभु बोलौ॥ विद्या दान मोहिं देहु भवानी। ज्ञान बुद्धि की तुम हो खानी॥ जो तुमको ध्यावै मन लाई। ताके कष्ट सब जाहिं नसाई॥ ब्रह्मा अर्धांगिनी तुम माता। वेद पुरान सब यश को गाता॥ ऋषि मुनि सब तुमको हैं सेवी। सिद्ध पीठ तुमरी शुभ देवी॥ विद्या बुद्धि मोहिं कछु नाहीं। तुमहिं राखो जननी मन मांही॥ जो यह पाठ करे चित लाई। ताको कष्ट न कबहूं आई॥ सरस्वती चालीसा जो गावैं। ऋद्धि सिद्धि धन सुख को पावैं॥ जो यह पाठ करे इक बारा। सो नर होय भव सागर पारा॥ मुनि जन सब तुमरी गुन गावैं। तुमरी महिमा पार न पावैं॥ जय जय जय सरस्वती माता। भक्तन की तुम हो सुखदाता॥

Benefits of Reciting Saraswati Chalisa

  • Enhances knowledge and wisdom
  • Improves concentration and memory
  • Bestows artistic and musical talent
  • Removes ignorance
  • Fosters speech and communication skills