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Om Jai Jagdish Hare
🙏 Lord Vishnu Aarti
Updated at 28 February 2026
About Om Jai Jagdish Hare
Om Jai Jagdish Hare is one of the most popular and universally sung aartis in Hinduism. Written by Pandit Shardha Ram Phillauri in 1870, this aarti is addressed to Lord Vishnu (Jagdish — the lord of the world). It is typically sung during evening prayers (sandhya aarti) in Hindu households and temples across India. The aarti appeals to God to remove the suffering and sorrows of his devotees and fulfill their spiritual desires.
🪔 Om Jai Jagdish Hare — Lyrics in Hindi
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे। ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का,
स्वामी दुख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, सुख सम्पत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का। ॐ जय जगदीश हरे॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी,
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ मैं जिसकी। ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी,
स्वामी तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी। ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता। ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, किस विधि मिलूँ दयामय,
तुमको मैं कुमति। ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी ठाकुर तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे। ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा,
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा। ॐ जय जगदीश हरे॥
Benefits of Reciting Om Jai Jagdish Hare
- Universal aarti for all deities
- Evening sandhya aarti
- Removes sorrows and hardships
- Grants peace and prosperity




